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कुछ इस तरह | Hindi Shayari | Small Poetry in Hindi | Hindi Kavita

कुछ इस तरह देखा उस कातिल ने ।
दिल मेरा घायल हो गया ।
सोचा की पुछु नाम उस हसीं का ।
जाने क्यू अल्फाज़ो ने साथ छोड़ दिया ।
चमक रही थी महफ़िल में किसी चाँद की मानिंद ।
नज़रो को जाने क्यू ठहराना मुश्किल हो गया ।
आये वो करीब मेरे कुछ पूछा हो उसने कुछ जेसे ।
जाने क्यू ये 'सुनिल' बावरा हो गया |



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